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पुस्तक चयन के लिए किन किन सिद्धांतों का ध्यान रखना आवश्यक होता है?

पुस्तक चयन के लिए किन किन सिद्धांतों का ध्यान रखना आवश्यक होता है?

अनापूर्त अंक हेतु स्मरण पत्र तैयार किया जाते हैं तथा उन्हें शीघ्रातिशीघ्र आपूर्तिकर्ता के पास भेज दिया जाता है ।
(vi) भुगतान:- पुस्तकालय द्वारा अंक प्राप्त होजाने के पश्चात् आपूर्तिकर्ता उनके भुगतान हेतु मूल्य का लेखा भेजता है, जिसे पहले प्राप्त मूल्य-सूची से मिलान कर आगे की कार्यवाही हेतु भेजा जाता है ।
इस सभी चरणों से होते हुए पुस्तकालय में धारावाहिकों का नियंत्रण किया जाता है । वस्तुनिष्ठ प्रश्न:1. निम्नलिखित में कौन सा प्रलेख धारावाहिक में शामिल नहीं है:
(क) शोध पत्रिकाएँ (ख) आवधिक प्रकाशन (ग) पत्रिकाएँ
(घ) पुस्तकें 2. निम्नलिखित में से कौन सा सूचना स्रोत नवीनतम जानकारी उपलब्ध कराता है।
(क) इंसाइक्लोपीडिया (ख) जर्नल (ग) पुस्तकें
(घ) डायरेक्ट्री 3. निम्नलिखित में कौन सी विधि धारावाहिकों के चयन हेतु उपयुक्त नहीं है:
(क) वांग्मय विश्लेषण द्वारा (ख) माँगकर्ता की माँग का विश्लेषण कर
(ग) संदर्भ पत्रिकाओं के संदर्भ विश्लेषण कर
(घ) मूल्य आधारित विधि द्वारा
4. पुस्तक चयन के सिद्धांत का प्रतिपादन किसने कियाः
(क) देवी (ख) रंगनाथन (ग) इयूरी
(घ) जे.डी. ब्राउन 4. कंप्यूटर द्वारा धारावाहिक नियंत्रण
धारावाहिक तंत्र की समस्त प्रक्रिया को सुचारू एवं सुव्यवस्थित बनाने हेतु कंप्यूटर का प्रयोग अति आवश्यक होता जा रहा है | कंप्यूटरीकृत धारावाहिक नियंत्रण हेतु सर्वप्रथम एक एकीकृत पुस्तकालय सॉफ्टवेयर का चयन अति आवश्यक है जिससे कि धारावाहिकों के क्रयादेश के समय अंकित किये गये आँकड़े का प्रयोग पुस्तकालय की अन्य प्रक्रियाओं यथा उनकी प्राप्ति, प्रसूची निर्माण, परिसंचालन इत्यादि में किया जा सके । वैसे धारावाहिक नियंत्रण तंत्र के कंप्यूटरीकृत करने के पूर्व हमें सॉफ्टवेयर में निम्नलिखित क्षेत्रों के होने की जाँच कर लेनी चाहिए । किसी भी पुस्तकालय सॉफ्टवेयर में धारावाहिक नियंत्रण हेतु निम्नलिखित क्षेत्रों का होना आवश्यक है:- अंतराल (Frequency

मुद्रा विनिमय दर स्मरण पत्र जारी करने की अवधि

क्रयादेश रद्द करने की अवधि - fashat its (Vendor's Code) - प्राप्ति अवधि
इन सभी क्षेत्रों के होने पर धारावाहिकों के अधिग्रहण के विभिन्न चरणों को निम्नलिखित प्रकार से कंप्यूटरीकृत किया जा सकता है:| (क) धारावाहिकों का चयन एवं अनुमोदन:- धारावहिकों के चयन के पश्चात् उनके हेतु एक प्रतिवेदन (Report) तैयार किया जाता है, जिसे प्राधिकर्ता के सम्मुख रखा जाता है । इस प्रकार के प्रतिवेदन को तैयार करने में कंप्यूटर एक अत्यंत ही उपयोगी यंत्र साबित हो रहा है । अनुमोदन हेतु सूची तैयार करने के लिए कंप्यूटर में निम्नलिखित ग्रंथात्मक विवरण भरे जाते
- जर्नल की आख्या
प्रकाशक प्रकाशन अवधि खण्ड, अंक एवं वर्ष
प्राप्ति के प्रकार - Get onls (Country code)
मूल्य
विक्रेता का नाम - आई एस एस एन (ISSN)
इन विवरणों के साथ तैयार सूची को प्राधिकर्ता के सम्मुख रखा जाता है । प्राधिकर्ता द्वारा अनुमोदित प्रकाशन के क्रयादेश हेतु आगे की प्रक्रिया की जाती है ।

(ख) क्रयादेश तैयार करना:- 

कंप्यूटर में अनुमोदन हेतु भेजे गये प्रकाशनों की सूची मौजूद रहती है । जिस धारावाहिक (जर्नल, पत्रिका, इत्यादि) के क्रय को अनुमोदित किया जाता है, उनके विवरण में अनुमोदित (Approved) अंकित कर दिया जाता है तथा शेष में अंकित नहीं किया जाता है । इस प्रकार से केवल अनुमोदित पुस्तकों की एक सूची कंप्यूटर स्वयं तैयार कर देता है । इसके साथ-साथ कंप्यूटर क्रयादेश संख्या भी स्वयं दे देता है । अनुमोदित पत्रिकाओं के कुल मूल्यों को भी कंप्यूटर गणना कर देता है । परंपरागत तरीके से मुद्रा विनिमय दर की गणना करने की प्रक्रिया भी कंप्यूटर की मदद से अत्यंत आसान हो गई है ।
कंप्यूटर द्वारा तैयार किये गये एक क्रयादेश का नमूना नीचे दिया जा रहा है:क्रयादेश संख्या : सरस्वती निलयम् पुस्तकालय / 3012 | 2001-2002 शीर्षक
आविष्कार विक्रेता : सेंट्रल न्यूज एजेंसी क्रयादेश की तिथि : 19-10-2001
कुल मूल्य : 96 रुपये (ग) प्राप्ति एवं नियंत्रण:- पत्रिकाओं के संबंधित अंक की प्राप्ति के पश्चात् कंप्यूटर में उनसे संबंधित अन्य सूचनाओं धारावाहिक नियंत्रण एवं को भरा जाता है । कुछ ग्रंथात्मक सूचनाएँ अनुमोदन के समय ही भर दी जारी हैं, अत: शेष सूचनाओं को अंकित करने की आवश्यकता रहती है । यदि प्राप्त अंक में किसी प्रकार की त्रुटि रहती है तो उसके आगे संबंधित चिन्ह अंकित कर दिया जाता है और उस अंक को वापस विक्रेता के पास भेज दिया जाता है, जो उसके स्थान पर दूसरी प्राप्ति के भेजने की व्यवस्था करता है । संबंधित विवरणिका पूर्ण करने के पश्चात् धारावाहिक को उपयोक्ता के प्रयोग हेतु प्रदर्शन रैक पर भेज दिया जाता है ।।
(घ) भुगतान:- अंक की प्राप्ति के पश्चात् पुस्तकालय उनके भुगतान हेतु प्रतिवेदन तैयार करता है, जिसमें कंप्यूटर अत्यधिक सहायता करता है । भुगतान हेतु लेखा (Bill) तैयार करना एक अत्यंत ही श्रमसाध्य एवं सावधानीपूर्वक किया जाने वाला कार्य है जिसमें मानवीय भूल होने की काफी संभावना बनी रहती है । अत: इस कार्य को कंप्यूटर की सहायता से आसानी पूर्वक संचालित किया जा सकता है । ।

(ङ) अनुक्रमणिका तैयार करना:- 

शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित आलेखों की अनुक्रमणिकाओं का एक महत्वपूर्ण स्थान है । एक उपयुक्त पुस्तकालय सॉफ्टवेयर का प्रयोग कर ग्रंथात्मक विवरण (यथा आलेख की आख्या, लेखक, अंक, वर्ष, पृष्ठ संख्या, मुख्यशब्द, सार, इत्यादि) अंकित किया जा सकता है, जो उपयोक्ता के समय की अत्यधिक बचत करता है । वस्तुनिष्ठ प्रश्न:1. कंप्यूटरीकृत धारावाहिक नियंत्रण हेतु निम्नलिखित में से क्या अनिवार्य नहीं है।
(क) कंप्यूटर तंत्र (ख) एकीकृत पुस्तकालय सॉफ्टवेयर (ग) कार्डेक्स
(घ) कंप्यूटर में प्रशिक्षित कर्मचारी 2. आई एस एस एन (ISSN) किस क्षेत्र से संबंधित है:
(क) धारावाहिकों की मानक संख्या से (ख) पुस्तकों की मानक संख्या से (ग) सॉफ्टवेयरों की मानक संख्या से ।
(घ) धारावाहिकों की मानक संख्या से ।।

3. सूक्ष्म प्रलेख (Micro documents) हेतु निम्नलिखित में क्या तैयार किया जाता है:

(क) ग्रंथसूची (Bibliography)
(ख) प्रलेखन सूची (Documentation List) (ग) अनुक्रमणिका (Index)
(घ) प्रसूची (Catalogue) 4. निम्नलिखित में किसका संबंध धारावाहिकों से नहीं है:
(क) आई एस एस एन (ISSN) (ख) कार्डेक्स (Kardex) (ग) प्रलेखन सूची (Documentation List)
(घ) दवितीयक सूचना स्रोत (Secondary Information Source) 5. कंप्यूटरीकृत धारावाहिक नियंत्रण हेतु प्रारूप तैयार करना
किसी भी कंप्यूटरीकृत धारावाहिक नियंत्रण हेतु तैयार किये गये प्रारूप में निम्नलिखित विशेषताओं का होना आवश्यक है ।। (क) किसी भी रिकॉर्ड संरचना में विभिन्न क्षेत्रों के साथ-साथ बाइंडिंग, अप्राप्य अंक हेतु
स्मरणिका इत्यादि से संबंधित सूचनाएँ भी होनी चाहिए ।
(ख) संबंधित तंत्र में ऑन लाइन खोज (On-line Searching) का प्रावधान होना चाहिए,
जिससे उपयोक्ता आलेख की आख्या, लेखक, जर्नल की आख्या, प्रमुख शब्द आदि
किसी भी प्रकार से अपने लिए उपयुक्त प्रलेख को खोज कर सके । (ग) तंत्र में स्वयं वर्णानुक्रमिका बनाने का प्रावधान होना चाहिए । (घ) यदि संबंधित प्रलेख निर्गमित हो या बाइंडिग में हो या पुस्तकालय से उसे हटा दिया
गया हो तो इसकी सूचना भी तंत्र से उपलब्ध हो जानी चाहिए ।

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