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इसमें तथ्य एवं आकड़े, विधियाँ, सिद्धान्त, आदि दिये हुए होते है जिससे विषय का सम्पूर्ण ज्ञान प्राप्त हो जाता है ।

इसमें तथ्य एवं आकड़े, विधियाँ, सिद्धान्त, आदि दिये हुए होते है जिससे विषय का सम्पूर्ण ज्ञान प्राप्त हो जाता है ।

4.8 निर्देशिकाएं
इन सूचना सोतों में पत्रिकाओं, व्यक्तियों, शैक्षणिक संस्थाओं एवं व्यावसायिक संगठनों आदि की सूचना होती है । इसमें इन संस्थाओं के पते, उद्देश्य, कार्यों एवं पदाधिकारियों की सूचना होती है । इनमें पत्रिकाओं की सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध होती है । इसमें सूचनाओं का व्यवस्थापन वर्णक्रमानुसार होता है। अतएव वांछित सूचना तुरन्त खोजी जा सकती है । निर्देशिकाओं की विषय सीमा व्यापक एवं विस्तृत होती है । निर्देशिकाएं व्यावसायिक संस्थाओं के उत्पादनों की सूचना भी देती है। ये दो प्रकार की होती है :
1 सामान्य निर्देशिकाएं
2 विशिष्ट निर्देशिकाएं

4.9 वाङ्गमय सूची

ये सन्दर्भ पुस्तकें, पुस्तकों की सूची होती है तथा प्रकाशित पुस्तकों के बारे में पूर्ण जानकारी देती है जैसे आख्या, लेखक का नाम, सम्पादक या अनुवादक का नाम, प्रकाशक का नाम व पता, मूल्य एवं साइज आदि । इनकी सहायता से पुस्तकालय में पुस्तक चयन आदि महत्वपूर्ण कार्य किये जाते है । इन्हें निम्नलिखित श्रेणियों में आगे विभक्त किया जा सकता है ।
सार्वभौमिक वाङ्गमय सूची- यह ज्ञान के प्रत्येक क्षेत्र में सभ्यता के सभी अभिलेखों का सर्वेक्षण है । इसका क्षेत्र, समय, स्थान, भाषा, विषय, आदि से सीमित नहीं होता है । यद्यपि ऐसी सूची अभी प्रकाशित नहीं हुई है, परन्तु वृहत पुस्तकालयों की सूचियों को इसके समकक्ष माना जा सकता है ।
राष्ट्रीय वाङ्गमय सूची - इस सूची में एक राष्ट्र में प्रकाशित पाठ्य सामग्री का लेखा होता है । डा. रंगानाथन के मतानुसार राष्ट्रीय वाङ्गमय सूची निम्नलिखित प्रकार की हो. सकती
1. किसी राष्ट्र में प्रकाशित पुस्तकों की सूची, 2. किसी राष्ट्र पर प्रकाशित पुस्तकों की सूची, 3. किसी राष्ट्र के नागरिकों पर प्रकाशित पुस्तकों की सूची, 4. किसी राष्ट्र के नागरिकों द्वारा प्रकाशित पुस्तकों की सूची,
उपरोक्त में से किन्हीं दो या दो से अधिक मिश्रण जैसे Indian national bibliography (INB) British national bibliography (BNB)
व्यावसायिक वाङ्गमय सूची - पुस्तक व्यवसायी संघ या प्रकाशक इन सूचियों को प्रकाशित करते है । इसके पीछे उनका उद्देश्य प्रकाशित पुस्तकों की सूचना देना होता है । इसका क्षेत्र राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय हो सकता है ।
| विषयगत वाङ्गमय सूची - ये सूचियाँ एक विषय पर प्रकाशित साहित्य को सूचीबद्ध करती है जैसे cumulative book index, books in print
लेखक वाङ्गमय सूची - इसमें एक लेखक के द्वारा या अन्य लेखकों के द्वारा इस लेखक पर लिखी हुई पुस्तकों की सूचना होती है । जैसे Cambridge bibliography of English

4.10 सारकरण एवं अनुक्रमणीकरण पत्रिकाएँ

ये पत्रिकाएँ वितीयक सूचना स्रोत की श्रेणी में सबसे अधिक महत्ता रखती है एवं शोधकर्ता इन पर पूरी तरह निर्भर रहते है । सारकरण पत्रिकाओं में विषय की प्राथमिक पत्रिकाओं में जो लेख प्रकाशित होते है उनका सारांश उपलब्ध होता है, जिसको पढ़कर पाठक मूल प्रलेख के विषय का पता चला लेता है । सारकरण पत्रिकाओं से तात्पर्य नियमित रूप से प्रकाशित तथा सुव्यवस्थित पत्रिकाओं से होता है जिनके अन्तर्गत संक्षेप में प्राथमिक स्रोतों की पत्रिकाओं के लेख जो उन विशिष्ट विषयों से सम्बन्धित हों, नवीन शोध मोनोग्राफ, प्रतिवेदन पेटेन्ट तथा अन्य प्राथमिक स्रोत प्रकाशनों को संकलित किया गया होता है । इनमें लेख के सारांश के साथ उसका संस्थात्मक विवरण भी होता है । इसका मुख्य उद्देश्य पाठक के समय को बचाना होता है क्योंकि प्रायः सूचनात्मक सार पढ़ने के बाद मूल प्रलेख को पढ़ने की आवश्यकता नहीं रहती । विभिन्न प्रकार के सार को पढ़कर उपयुक्त प्रलेख खोजने का कार्य भी सहजता से हो जाता है ।
अनुक्रमणीकरण पत्रिकाएं वे पत्रिकाएं होती है जो नियमित अंतराल के पश्चात प्रकाशित होती है । इसका विषय क्षेत्र प्रायः एक वृहत विषय होता है । विषय क्षेत्र में जितने भी लेख प्राथमिक सूचना स्रोतों में प्रकाशित होते है उसको व्यवस्थित सूचना अनुक्रमणीकरण पत्रिकाओं में उपलब्ध होती है । इनकी सहायता से एक विषय पर साहित्य खोजा जा सकता है । विशेषज्ञों एवं गहन अध्ययन करने वालों को इससे उनके विषय क्षेत्र में नवीन शोधों एवं विषय विकास की जानकारी प्राप्त होती है ।।
सारकरण एवं अनुक्रमणीकरण पत्रिकाओं के द्वारा पुस्तकालय में सामयिक अभिज्ञता सेवा दी जाती है, जिससे पाठकों के सामयिक अभिगम की पूर्ति होती है क्योंकि शोधकर्ता अपने स्वयं के प्रयासों से अपने ज्ञान को अद्यतन नहीं रख सकता है । इनकी सहायता से अनुदर्शी साहित्यक खोज भी आसानी से की जाती है । ये साहित्य के वाङ्मयात्मक नियन्त्रण में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते है । सार पत्रिकाएं काफी सीमा तक भाषा अवरोध की समस्या भी हल करती है। क्योंकि प्राथमिक स्रोतों में लेख कई भाषा में प्रकाशित होते है परन्तु सार पत्रिका में सार लोकप्रिय भाषा में प्रकाशित होते है जिससे प्रायः सभी विशेषज्ञ परिचित होते है ।

4.11 प्रगति समीक्षा

सारकरण एवं अनुक्रमणीकरण पत्रिकाओं की संख्या में प्राथमिक सूचना के स्रोतों के बराबर ही वृद्धि के कारण प्रायः शोधकर्ताओं के द्वारा एक विषय पर संबन्धित साहित्य को खोज पाने में कठिनाई महसूस की जाती है । अन्तर्विषयी अभिगम की पूर्ति के लिए एक से अधिक सार एवं अनुक्रमणीकरण पत्रिकाओं को खोजने में अधिक समय लगता है तथा कठिनाई का अनुभव होता है । फलस्वरूप इस कठिनाई को दूर करने के लिये समीक्षात्मक साहित्य के प्रकाशन को महत्ता दी गई । समीक्षात्मक साहित्य एक विशिष्ट विषय पर विद्वानों द्वारा लिखा गया एक विस्तृत प्रलेख होता है जिसमें उस विषय में हुई प्रगति एवं विकास का लेखा होता है । इसमें सूचना प्राथमिक स्रोतों में उपलब्ध जानकारी को आधार बनाकर इस प्रकार वर्तमान समय में ये प्रलेख वार्षिकी के रूप में प्रकाशित हो रहे है । कई विषय की पत्रिकाओं में भी लेख रूप में इस प्रकार की सूचना दी जाती है ।

4.12 साहित्यिक मार्गदर्शिकाएं - 

इन सूचना स्रोतों का मुख्य उद्देश्य पाठकों की किसी विषय विशेष के साहित्य का उपयोग करने में सहायता एवं मार्गदर्शन प्रदान करना होता है । ऐसी मार्गदर्शिका का उद्देश्य एक विषय के ग्रंथपरक संरचना को प्रस्तुत करना भी होता है एक विषय के मूल्यांकन एवं प्रारम्भिक स्थिति से लेकर उसके विकास की जानकारी भी ये प्रदान करती हैं विषय के विकास को ग्रंथात्मक उपकरणों के द्वारा दर्शाया जाता है, उदाहरणार्थ A guide to the literature of chemistry by E.J.Crane
4.13 शोध प्रगति सूची - शोध कार्यो की पुनरावृत्ति एवं अतिव्यापन को कम करने के लिए यह आवश्यक है कि वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं को विभिन्न शोध संस्थाओं में चल रही शोध परियोजना की जानकारी होनी चाहिए । 

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