Latest job news, Exams, GPSC, UPSC, Sarkari Nokari, Bharati Updates, GK, General Awareness, OJAS

सन्दर्भ प्रश्नों का उत्तर देने के लिए सबसे प्रथम प्रयुक्त शब्दों की व्याख्या

सन्दर्भ प्रश्नों का उत्तर देने के लिए सबसे प्रथम प्रयुक्त शब्दों की व्याख्या शब्दकोश

| सन्दर्भ पुस्तकों में शब्दकोश का एक प्रमुख स्थान होता है । इसका उपयोग मनुष्य अपने प्रारम्भिक जीवन से ही करने लगता है | शब्दकोश एक सन्दर्भ पुस्तक होती है जिसमें शब्द साधारणतः वर्णानुक्रम में संयोजित रहते है और उसमें अनेक रूप, उद्धरण, कार्य, उत्पत्ति, अर्थ, आदि संकलित रहते है | इनमें भाषा के शब्दों की सम्पूर्ण जानकारी दी हुई होती है | यदि शब्दकोश विषय के होते है तो उसमें उस विषय के मुख्य पारिभाषिक शब्दों की जानकारी दी हुई होती है | सन्दर्भ प्रश्नों का उत्तर देने के लिए सबसे प्रथम प्रयुक्त शब्दों की व्याख्या करनी आवश्यक होती है । जिसके लिए शब्द कोशों की सहायता लेनी पड़ती है। इन्हें दो श्रेणियों में बांटा जाता है : 1 सामान्य शब्दकोश एवं 2 विषयगत शब्दकोश ।। |

1 सामान्य शब्दकोश- 

इनमें एक अथवा अधिक भाषाओं के शब्दों की जानकारी दी हुई होती है । जिस शब्दकोश में दो भाषाओं के शब्द दिये हुए होते है उन्हें विभाषी शब्दकोश कहा जाता है। उदाहरणार्थ:
1 Comprehensive English-Hindi Dictionary by Dr. Raguvira 2 Oxford English Dictionary 3 हिन्दी शब्द सागर
4 व्यवहारिक हिन्दी - अंग्रेजी शब्द कोश 2 विषयगत शब्दकोश- इनमें एक विषय के सभी प्रमुख शब्दों की परिभाषा दी हुई होती है।
| शब्दों का व्यवस्थापन वर्ण क्रमानुसार होता है । उदाहरणार्थ1. मानविकी कोश
2. ALA Glossary of Library Terms उपयोगिताइस प्रकार शब्दकोश पाठक को निम्न प्रकार की जानकारी देता है:
1 किसी भी शब्द एवं मुहावरे का अर्थ व सही उपयोग 2 शब्दों का उच्चारण 3 शब्दों का वर्णविन्यास 4 शब्दों की उत्पत्ति एवं क्रमिक विकास 5 शब्दों के विलोम, पर्यायवाची एवं अनेकार्थक शब्द 6 शब्दों के संकेताक्षर, संकेत चिन्ह, परिवर्तित शब्द का अर्थ 7 विदेशी भाषा के उन शब्दों का अर्थ जिनका किसी भाषा में समावेश हो चुका हो । 8 मुख्य व्याक्तिगत नामों की जानकारी जिनको विषय के इतिहास में कोई स्थान मिल
गया है। 9 मुख्य स्थानों, नदियों एवं पर्वतों के नाम
10 मुहावरों की जानकारी देना ।

4.2 विश्वकोश । 

विश्वकोश वह कृति होती है जिसमें समस्त ज्ञान के संश्लेषण को सुसंगठित व क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत किया जाता है । इस कृति में विषयों, उप-विषयों पर सूचनात्मक लम्बे लेख होते हैं। और लेखों का व्यवस्थापन वर्णक्रमानुसार होता है ।
ऑक्सफोर्ड इंगलिश डिक्शनरी के अनुसार "ज्ञान की समस्त शाखाओं से संबन्धित विस्तृत सूचना सामग्रीयुक्त एवं सूचना वर्णानुक्रमभेद-विन्यासित साहित्यिक कृति को विश्वकोश कहते है । " विषय की पृष्ठ भूमि से सम्बन्धित जितने भी प्रश्न पाठ्य द्वारा पूछे जाते हैं, उन प्रश्नों का उत्तर विश्वकोश की सहायता से दिया जा सकता है, जैसे पनडुब्बी का संक्षिप्त या कम्प्यूटर का इतिहास आदि प्रश्नों के उत्तर न्यू एन्साइक्लोपिडिया - ब्रिटेनिका जो एक सामान्य विश्वकोश है, में मिलेंगे । विश्वकोश को दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है| 1 सामान्य विश्वकोश - सामान्य विश्वकोश वे सन्दर्भ स्रोत होते है जिनका विषय क्षेत्र एक विषय या विषय समूह तक सीमित नहीं होता है, वरन् इसमें सभी मानवीय ज्ञान को एकत्रित करने का प्रयास किया जाता है जैसे Encyclopedia Britannica एवं Encyclopedia Americana

| 2 विशिष्ट विश्वकोश - 

विशिष्ट विश्वकोश में एक विषय समूह से सम्बन्धित सूचना को एकत्रित करके एक स्थान पर व्यवस्थित करने का प्रयास किया जाता हैं । इसमें लेख, विषय के नाम से वर्णक्रमानुसार व्यवस्थित होते है । विज्ञान, समाज विज्ञान एवं मानविकी ज्ञान पर काफ़ी प्रकाशित विश्वकोश मिल जाते है । जैसे,
Iternational Encyclopedia of Social Sciences Encyclopedia of Library and Information Seience
उपयोगिता 1. विषय की पृष्ठभूमि से सम्बन्धित प्रश्नों की सूचना प्राप्त करने के लिए यह एक उत्तम स्रोत है । जैसे पुस्तकालय के इतिहास को जानने के लिए पुस्तकालय विज्ञान के विश्वकोश का उपयोग कर सकते है ।
2. सामान्य प्रकृति के तथ्यात्मक प्रश्नों का उत्तर भी इनकी सहायता से प्राप्त किया जा सकता है | जैसे महात्मा गाँधी की जन्म तिथि, नवजागरण युग का आरम्भ ।।
3. विश्वकोश में सम्मिलित लेखों के अन्त में पठनीय सामग्री की एक सूची दी होती है, उसकी सहायता से पाठक अन्य पाठ्य सामग्री को पढ़कर विस्तृत एवं गहन ज्ञान अर्जित कर सकता है |
4. इसमें सांख्यिकी से सम्बन्धित सूचना भी दी हुई होती है, जैसे जनसंख्या के आंकड़े ।
5. इसमें सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक क्षेत्रों के प्रमुख व्यक्तियों की संक्षिप्त जीवनियाँ भी दी हुई होती है, उदाहरणार्थ, महात्मा गाँधी की जीवनी ।।

विश्वकोश की सीमायें: - 

विश्वकोश की कुछ सीमायें होती है, जिनका वर्णन नीचे दिया जा रहा
है: - 1. ज्ञान में निरन्तर वृद्धि होती है, तथा इनका संशोधित संस्करण तुरन्त प्रकाशित करना संभव नहीं होता है । अतएव विषय के नये विकास को इसके लेखों में सम्मिलित नहीं किया जाता है । अतएव यह आवश्यक है कि विश्वकोश के साथ प्रकाशक वार्षिकी भी प्रकाशित करे जिससे विश्वकोश की सूचना को अद्यतन बनाये रखा जा सके । कई विश्वकोश इस तरह की वार्षिकी का प्रकाशन करते है।
2. स्थानाभाव के कारण सम्पादक के कई लेख विश्वकोश के नये संस्करण में से हटाने पड़ते है ताकि नये लेख सम्मिलित किए जा सकें ।। | 3. लेखों के साथ संलग्न पुस्तकों की सूची होती है जो सम्पूर्ण एवं अद्यतन नहीं होती है ।
4. कई विश्वकोशों का किसी देश या विचारधारा की तरफ झुकाव होता है जिससे सभी विषयों के साथ समान व्यवहार नहीं हो पाता है ।

 4.3 जीवनी स्रोत

ये स्रोत विशिष्ट व्यक्तियों जिन्होंने किसी भी सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक क्षेत्रों में कोई योगदान दिया हो, के बारे में व्यापक सूचना प्रदान करते हैं । इनमें व्यक्ति की जन्म तथा मृत्यु तिथि, शैक्षणिक योग्यता, पद एवं उसके कार्यकलापों के बारे में संक्षिप्त या विस्तृत जानकारी शामिल है । लुइस शोर्स के मतानुसार "जीवनी कोश मुख्यतया प्रमुख व्यक्तियों की निर्देशिका होती है, जिसका व्यवस्थापन वर्णक्रमानुसार होता है एवं जिसमें जानकारी रूपरेखा से लेकर विस्तृत भी हो सकती है । " इन्हें निम्न श्रेणियों में बांटा जा सकता है:| 1. अन्तर्राष्ट्रीय जीवनी कोश - इन सन्दर्भ पुस्तकों का क्षेत्र अन्तर्राष्ट्रीय होता है अर्थात संस्था के सभी विषयों के प्रमुख व्यक्तियों का विवरण इसमें दिया जाता है । उदाहरणार्थ Webster's Biographical Dictionary, International who's who इत्यादि ।
2. राष्ट्रीय जीवनी कोश - इनका क्षेत्र किसी एक राष्ट्र के प्रमुख व्यक्तियों जिन्होंने किसी भी क्षेत्र में योगदान दिया हो, तक सीमित रहता है, जैसे dictionary of national biography, india who's who srella

0 Comments:

Post a Comment

Menu :
Powered by Blogger.